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Showing posts from January, 2026

अश्वत्थामा को श्राप

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  अश्वत्थामा को भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए श्रा की कथा भारतीय पौराणिक इतिहास और महाभारत के सबसे गंभीर प्रसंगों में से एक है। यह कथा केवल एक दंड की नहीं, बल्कि कर्म, अहंकार और उसके भयावह परिणामों की सीख है। ​नीचे इस कथा को विस्तृत रूप से विभिन्न शीर्षकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है: ​1. अश्वत्थामा का परिचय और उसकी शक्ति ​ अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य और माता कृपी के पुत्र थे। वह साक्षात  भगवान शिव के अंशावतार  माने जाते थे। उनके जन्म के समय उनके कंठ से अश्व (घोड़े) जैसी ध्वनि निकली थी, जिसके कारण उनका नाम 'अश्वत्थामा' पड़ा। ​ दिव्य मणि:  जन्म से ही अश्वत्थामा के मस्तक पर एक अमूल्य और दिव्य मणि थी। यह मणि उसे भूख, प्यास, थकान, अस्त्र-शस्त्र, व्याधि और देवताओं के भय से मुक्त रखती थी। ​ अस्त्र ज्ञान:  द्रोणाचार्य के पुत्र होने के नाते उन्हें ब्रह्मास्त्र सहित सभी घातक अस्त्रों का ज्ञान प्राप्त था। यद्यपि वह पांडवों के भी मित्र थे, लेकिन पिता के प्रति निष्ठा और दुर्योधन की मित्रता के कारण उन्होंने कौरवों का पक्ष चुना। ​2. प्रतिशोध की ज्वाला: महाभारत युद्ध का...

भृगु ऋषि द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा:

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  भृगु ऋषि द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा:  धैर्य और क्षमा की महागाथा प्राचीन काल की बात है, सरस्वती नदी के तट पर ऋषियों और मुनियों का एक विशाल सम्मेलन हो रहा था। चर्चा का विषय अत्यंत गूढ़ था—"त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) में सबसे श्रेष्ठ और उपासना के योग्य कौन है?" ऋषियों के बीच मतभेद था। कोई ब्रह्मा जी की सृजन शक्ति का गुणगान कर रहा था, तो कोई शिव की वैराग्यपूर्ण महानता का। अंततः यह निर्णय लिया गया कि तीनों देवों की परीक्षा ली जाए। इस कठिन कार्य के लिए महर्षि भृगु को चुना गया, जो ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के लिए जाने जाते थे। 1. ब्रह्मा जी की परीक्षा:   पुत्र का मोह और अहंकार :-  भृगु ऋषि सर्वप्रथम अपने पिता ब्रह्मा जी के पास सत्यलोक पहुँचे। उन्होंने जानबूझकर ब्रह्मा जी को न तो प्रणाम किया और न ही उनकी स्तुति की। वे उनके सामने एक उद्दंड व्यक्ति की भाँति खड़े हो गए। ब्रह्मा जी अपने पुत्र के इस व्यवहार से अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने इसे अपना अपमान समझा। यद्यपि भृगु उनके पुत्र थे, फिर भी ब्रह्मा जी ने उन्हें दंड देने के लिए अपना क्रोध प्र...