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अश्वत्थामा को श्राप

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  अश्वत्थामा को भगवान श्री कृष्ण द्वारा दिए गए श्रा की कथा भारतीय पौराणिक इतिहास और महाभारत के सबसे गंभीर प्रसंगों में से एक है। यह कथा केवल एक दंड की नहीं, बल्कि कर्म, अहंकार और उसके भयावह परिणामों की सीख है। ​नीचे इस कथा को विस्तृत रूप से विभिन्न शीर्षकों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है: ​1. अश्वत्थामा का परिचय और उसकी शक्ति ​ अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य और माता कृपी के पुत्र थे। वह साक्षात  भगवान शिव के अंशावतार  माने जाते थे। उनके जन्म के समय उनके कंठ से अश्व (घोड़े) जैसी ध्वनि निकली थी, जिसके कारण उनका नाम 'अश्वत्थामा' पड़ा। ​ दिव्य मणि:  जन्म से ही अश्वत्थामा के मस्तक पर एक अमूल्य और दिव्य मणि थी। यह मणि उसे भूख, प्यास, थकान, अस्त्र-शस्त्र, व्याधि और देवताओं के भय से मुक्त रखती थी। ​ अस्त्र ज्ञान:  द्रोणाचार्य के पुत्र होने के नाते उन्हें ब्रह्मास्त्र सहित सभी घातक अस्त्रों का ज्ञान प्राप्त था। यद्यपि वह पांडवों के भी मित्र थे, लेकिन पिता के प्रति निष्ठा और दुर्योधन की मित्रता के कारण उन्होंने कौरवों का पक्ष चुना। ​2. प्रतिशोध की ज्वाला: महाभारत युद्ध का...

भृगु ऋषि द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा:

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  भृगु ऋषि द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा:  धैर्य और क्षमा की महागाथा प्राचीन काल की बात है, सरस्वती नदी के तट पर ऋषियों और मुनियों का एक विशाल सम्मेलन हो रहा था। चर्चा का विषय अत्यंत गूढ़ था—"त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) में सबसे श्रेष्ठ और उपासना के योग्य कौन है?" ऋषियों के बीच मतभेद था। कोई ब्रह्मा जी की सृजन शक्ति का गुणगान कर रहा था, तो कोई शिव की वैराग्यपूर्ण महानता का। अंततः यह निर्णय लिया गया कि तीनों देवों की परीक्षा ली जाए। इस कठिन कार्य के लिए महर्षि भृगु को चुना गया, जो ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के लिए जाने जाते थे। 1. ब्रह्मा जी की परीक्षा:   पुत्र का मोह और अहंकार :-  भृगु ऋषि सर्वप्रथम अपने पिता ब्रह्मा जी के पास सत्यलोक पहुँचे। उन्होंने जानबूझकर ब्रह्मा जी को न तो प्रणाम किया और न ही उनकी स्तुति की। वे उनके सामने एक उद्दंड व्यक्ति की भाँति खड़े हो गए। ब्रह्मा जी अपने पुत्र के इस व्यवहार से अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने इसे अपना अपमान समझा। यद्यपि भृगु उनके पुत्र थे, फिर भी ब्रह्मा जी ने उन्हें दंड देने के लिए अपना क्रोध प्र...

The Divine Journeys and Profound Miracle of Guru Nanak Dev in Mecca

  The Divine Journeys and Profound Miracle of Guru Nanak Dev in Mecca ​ The Legacy of the First Sikh Guru's Universal Message ​Guru Nanak Dev, the venerable first Guru of the Sikhs, was a figure of miraculous grace and profound spiritual insight from his earliest days. Born on April 15, 1469, in Talwandi (now Nankana Sahib, Pakistan), the tales of his inherent spiritual power and wisdom spread far and wide, laying the foundation for a transformative spiritual movement. His life was not merely a sequence of events but a deliberate mission encapsulated in his extensive travels, known as the Udasis . ​The fundamental purpose behind the Guru’s arduous and often perilous journeys was to serve society, dismantle the rigid structures of superstition, and eliminate the false beliefs that plagued the common people. He championed the spirit of universal goodwill and harmony (Sarva Bhav Sambhav) , a doctrine of equality and peace that transcended religious and social divisions. With this ...

जब गुरु नानक ने मक्का मदीना में किया चमत्कार

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सिक्खों के प्रथम गुरु नानक देव बचपन से चमत्कारी थे. उनके चमत्कार के चर्चे दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे. नानक ने अपने जीवन में कई देशों की यात्रा किया , गुरु के उन यात्राओं के पीछे समाज कल्याण का भाव और समाज में फैली कुरीतियां व   भ्रामक धारणाओं को नष्ट करना था. सर्व भाव संभव के इरादे से नानक देव   कई मुस्लिम देश और अरब देशों में गए और उन यात्राओं के दौरान उन्होंने कई चमत्कार किया. नानक देव के उन चमत्कारों के पीछे का प्रायोजन , केवल एक ईश्वरीय भाव को दर्शाना था. धरती पर आज भी उनके द्वारा किये गए चमत्कारों के प्रतीक मौजूद हैं , लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुरु नानक देव ने अपनी शक्तियों के बल पर मुस्लिमों के पवित्र स्थल काबा की दिशा ही बदल दी थी. उनके इस चमत्कार के पीछे भी बहुत बड़ा संदेश था. तो चलिए जानते हैं कि आखिर नानक देव ने   ऐसा चमत्कार क्यों किया. चमत्कारिक आभा के साथ जन्मे थे नानक देव शेखपुरा (पाकिस्तान) के तलवंडी जिले में कालूचंद वेदी के घर 15 अप्रैल 1469 को एक तेजस्वी-ओजस्वी पुत्र पैदा हुआ. वह बालक कोई और नहीं गुरु नानक देव थे. उन्हें नानक नाम उनकी बेबे ...

भगवान बुद्ध के विचार जो जीवन को देते हैं नया आयाम

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  एक शुद्ध विचार आपके जीवन में हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता रहता है। महात्मा बुध कहते हैं कि,‌"अक्रोध से क्रोध पर विजय प्राप्त करो।  अच्छाई से बुराई को जीतो।  क्षुद्रता को उदारता से जीतें।  सच्चाई से बेईमानी को जीतो"!  आध्यात्मिकता का मार्ग बुद्ध के विचारों में निहित है. बुद्ध का मानना था कि, "साझा करने से खुशी कभी भी कम नहीं होती है। आध्यात्मिकता का मार्ग आपकी बौद्धिकता को ईश्वर के साथ जोड़ने का कार्य करता है. आज के विचार में बुध का संदेश है कि, जिस प्रकार तूफान से ठोस चट्टान नहीं हिलती, उसी प्रकार बुद्धिमान लोग प्रशंसा या दोष से प्रभावित नहीं होते हैं। सत्य का ज्ञान होना बेहद जरूरी है और सत्य बुद्ध के बौद्धिक विचार में निहित है।  सत्य का ज्ञान होना बेहद जरूरी है और सत्य बुद्ध के बौद्धिक विचार में निहित है। बौद्धिकता बुद्ध के विचार में निहित है।  सत्य का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। भगवान बुध कहते हैं कि "सत्य के मार्ग पर चलते हुए कोई दो ही गलतियां कर सकता है, पूरा रास्ता ना तय करना और उसकी शुरुआत ही ना करना।  #gautambuddha #thoughtoftheday #...

सुरों की मल्लिका सुनिधि चौहान

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सुरों की मल्लिका सुनिधि चौहान किसी परिचय की मोहताज नहीं. उनके गाये गए हर गाने अपने आपमें उनकी कामयाबी को प्रमाणित करते हैं. शायद यही वजह है कि आज ये लाखों दिलों पर राज कर रही हैं. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर प्लेबैक सिंगर की थी. वह हिंदी गानों के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं जैसे पंजाबी, तेलुगु, मराठी और उर्दू में अपनी आवाज़ का जौहर दिखा चुकीं  हैं. वहीं सुनिधि ने कुछ अंग्रेजी गाने भी गाये हैं. इसी के साथ ही उन्होंने  पाकिस्तानी बैंड जुनून के साथ भी करार किया था. दिलचस्प बात यह है कि सुनिधि जितना अच्छा गाती हैं, उतनी ही खूबसूरत भी हैं. यही कारण है की सुनिधि वर्ष 2013 में एशिया की टॉप 50 सेक्सियस्ट लेडीज में भी अपनी जगह बनाई,  मगर उनके पारिवारिक जीवन में भी कई उतार चढ़ाव देखने को मिलता है. ऐसे में सुनिधि की जिंदगी के रोचक बातों के बारे में जानना दिलचस्प होगा... पिता से मिली संगीत की प्रेरणा सुनिधि का जन्म  14 अगस्त, 1983 को दिल्ली में हुआ. इनके पिता दुष्यंत कुमार संगीतकार थे. इसका असर सुनिधि पर भी हुआ. उन्होंने 4 वर्ष की उम्र में ही गाना शुरू कर दिया. प...

देश के प्रधानमंत्री का विचार

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  'भारत रत्न' अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री के साथ-साथ राष्ट्रकवि भी थे. उनका कहना था कि " मेरे पास भारत का एक दृष्टिकोण है- भारत भूख और भय से मुक्त बनाने का, भारत को निरक्षरता से मुक्त करने का और यही चाहता है।"  #भारत #रत्न #राष्ट्रकवि  #AtalBihariVajpayee  #bharatratna #BJPGovt व्यक्ति का शरीर मरता है। उसके विचार नहीं। इंदिरा गांधी के विचार निश्चित रूप से समाज को एक अलग दिशा प्रदान करते हैं। #IndiraGandhi #gandhi #nehru #JawaharlalNehru  #Congress #BJPGovt  #RahulGandhi #PriyankaGandhi  #SoniaGandhi  #RajeevGandhi #sansad #india #Parliament लाल बहादुर शास्त्री जी ने भारत की आजादी में योगदान देने के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. उनका पूरा जीवन देश की सेवा में बीता. उनका सम्पूर्ण जीवन सादगी, शालीनता, और ईमानदार व्यक्तित्व के धनी लोगों में शुमार रहा, शास्त्री जी ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कभी भी समझौता नहीं किया. जब पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया तो शांत स्वभाव के शास्त्री जी ने पाकिस्तान को इसकी ही ...